चंडीगढ़: सेक्टर 25 में भारतीय क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी (आरएमपीआई) की पंजाब राज्य समिति द्वारा आयोजित एक भव्य रैली में पंजाब के सभी लोगों से केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे संघीय अधिकारों के निरंतर घोर उल्लंघन, पंजाब के खिलाफ उत्पीडऩ और भेदभाव और पंजाब की शान्ति और व्यवस्था को भंग करने के लिए एजेंसियों और चरमपंथियों द्वारा किए जा रहे दमन के खि़लाफ आवाज़ उठाने का आह्वान किया गया है। रैली को संबोधित करते हुए पार्टी नेताओं ने कानून व्यवस्था बनाए रखकर प्रांत के लोगों को आपराधिक गिरोहों से बचाने में बुरी तरह विफल रही पंजाब की भगवंत सिंह मान सरकार पर भी तीखा प्रहार किया है।
एक प्रस्ताव द्वारा मांग की गई है कि पंजाब समेत पूरे देश में बिना मुक़दमे के जेल में बंद और अपनी सजा पूरी कर चुके राजनीतिक कैदियों, बुद्धिजीवियों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए; पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ को तत्काल पंजाब को सौंप दिया जाए; नदियों के जल का वितरण रीपेरीयन सिद्धांत के अनुसार किया जाए; पंजाबी भाषी क्षेत्रों को पंजाब में शामिल किया जाए; पंजाब समेत पूरे देश में पंजाबी भाषा को उचित सम्मान और गरिमा दी जाए; भाखरा-ब्यास प्रशासनिक बोर्ड में पंजाब का खोया हुआ दर्जा बहाल किया जाए; पंजाब को नष्ट करने की साजिशों को तत्काल रोका जाए। इस अवसर पर यह घोषणा की गई कि उपरोक्त मांगों को पूरा करने के लिए धर्म और जाति के भेदभाव से ऊपर उठकर सभी पंजाबियों का संयुक्त संघर्ष छेड़ा जाएगा।
इस भव्य रैली को पार्टी के महासचिव कॉमरेड मंगत राम पसला, राज्य समिति के सचिव कॉमरेड परगट सिंह जामाराए, राज्य सचिवालय के सदस्य कुलवंत सिंह संधू, सज्जन सिंह, डॉ. सतनाम सिंह अजनाला, दर्शन नाहर और रवी लोहगड ने संबोधित किया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), जिसने अपने राजनीतिक दल भाजपा के माध्यम से देश की केंद्रीय सत्ता पर कब्जा कर लिया है, देशवासियों, विशेषकर पंजाबियों को सिख गुरुओं द्वारा रचित मानवतावादी वाणी, भक्ति आंदोलन के महान नेताओं के तर्कसंगत ज्ञान, गदरी नायकों और शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके साथियों की क्रांतिकारी विचारधारा के साथ-साथ प्रगतिशील सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी भटकाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि संघ परिवार पंजाबियों के अडिग स्वभाव और अन्याय के हर रूप के विरुद्ध लडऩे और जान देने की इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत को अपनी पिछड़ी विचारधारा के प्रसार और धर्म-आधारित हिंदुत्वी राष्ट्र स्थापित करने के अपने घातक एजेंडे को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा मानता है। उन्होंने पंजाब की जनता से संघ परिवार की विभाजनकारी साजिशों से अवगत होने और उसके नापाक मंसूबों को नाकाम करने की पुरजोर अपील की।
हाथों में लाल झंडे लिए जनसभा में पहुंचे लोगों के बुलंद नारों ने पूरे माहौल को क्रांतिकारी रंग में रंग दिया। वक्ताओं ने कहा कि यह बेहद दुख और रोष का विषय है कि पंजाब में बदलाव का नारा लगाकर सत्ता हथियाने वाली ‘आप’ सरकार केंद्र में मोदी सरकार की उन्ही नीतियों को लागू कर रही है, जो जनता को गरीब बना रही हैं और अमीरों की तिजोरियां भर रही हैं। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के खुले समर्थन से पूरे राज्य में नशीले पदार्थों के तस्कर, आपराधिक गिरोह और रेत-बजरी माफिया बेखौफ घूम रहे हैं। हत्याएं, लूटपाट, छीना-झपटी और जबरन वसूली रोजमर्रा की घटनाएं बन गई हैं। मान सरकार अपनी खराब छवि से जनता की ध्यान भटकाने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये लुटा रही है और संघर्षरत वर्गों का दमन कर रही है। वीआईपी संस्कृति और भ्रष्टाचार हद पार कर चुके हैं। नेताओं ने जनविरोधी नीतियों और राज्य सरकार के खराब प्रदर्शन के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि देश और प्रांत में वास्तविक जनहितैषी परिवर्तन लाने के लिए वामपंथी दलों को एकजुट करने के प्रयासों को जारी रखते हुए, देश को सांप्रदायिक फासीवाद के हमलों से मुक्त करने की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए वामपंथी, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों, नागरिक समाज और प्रगतिशील आंदोलन की एकजुटता और संघर्ष को और तेज किया जाएगा।
एक प्रस्ताव में, पंजाब सरकार द्वारा ‘हिंद समाचार अखबार समूह’ पर किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की गई।
रैली के बाद एक विशाल जन जुलूस निकाला गया और प्रधानमंत्री तथा राज्य के मुख्यमंत्री को याचिकाएं भेजी गईं।
रैली की अध्यक्षता रतन सिंह रंधावा, गुरनाम सिंह दाऊद, नत्था सिंह दढवाल और सुरिंदर गिल जयपाल ने की। मंच संचालक का कार्यभार राज्य समिति के कोषाध्यक्ष प्रोफेसर जयपाल सिंह ने संभाला।








